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 Diabetes 

डायबिटीज आज समस्त विश्व में एक आम बीमार हो गई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है लोगों का अनियमित जीवन शैली। अनियमित जीवन शैली व्यक्ति के जीवन में एक धीमी गति की स्थिति लेकर आ जाता है और ना जाने इंसान कब मधुमेह का शिकार हो जाता है उसे खुद पता नहीं चलता है।



मधुमेह के सबसे बुरी स्थिति तब हो जाती है जब इंसान को आम भोजन जैसे चावल, दाल, आटे की रोटी, आलू तक नुक्सान करने लग जाता है। फर्ज कीजिए कि ये सारी चीजें जो हमने अभी नाम ली हैं, भूख लगाने पर इंसान यहीं खाता है, चाहे वह कितना भी पैसे वाला क्यों न हो। हर व्यक्ति भारत में आमतौर पर यहीं खाता है चाहे अमीर हो या गरीब।


डॉक्टर ने भी ऐसी रिसर्च कर ली और ऐसे पैमाने बना लिए कि उसके ऊपर जाने पर शुगर की स्थिति ख़तरनाक है।

आजकल बाजार में एलोपैथ की जो दवाई डायबिटीज के लिए उपलबध है उनमें मेटाफोर्मिन इतना ज्यादा होता है कि जो धीरे-धीरे मनुष्य के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।


भारत की आजादी जनता आज भी गांव में रहती है। मेडिकल सुविधा पहले से जरूर कुछ अच्छी हुई है लेकिन पैसे की कमी के कारण आज भी एक लंबी आबादी एक अच्छी चिकित्सा से वंचित रह जाती है।

नतीजन व्यक्ति इन आम दवा को खा कर अपने शरीर का नाश कर लेता है।

अब हम सीधे मुद्दे की बात करते हैं कि मधुमह से चुटकारा कैसे पाया जा सकता है।


यहां हम बिंदुवार कुछ बिंदुओं पर चर्चा करेंगे..


जीवन शैली मैं सुधार: मधुमेह के रोगी को रोज सुबह करीब 5 किलोमीटर पैदल चलना चाहिए। साथ ही शरीर के साथ समुच्चित व्यायाम भी करना चाहिए।

जीवन में चीनी के प्रयोग को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।



चीनी की जगह प्राकृतिक फल, फुल या गुड़ का प्रयोग किया जाना चाहिए।


जामुन का चूरन, कड़वा इंद्र जौ का चूरन, त्रिफला का चूरन: तीनो चूरन के मिसरन से हम मधुमेह की बड़ी ही कारगर दवा तैयार करेंगे। चाहे आप का शुगर किसी भी स्टेज का हो। आप इन तीनो चूरन की बराबर मात्रा, आपस में मैं मिला कर एक नया चूरन बनाइये और रोज एक चम्मच दिन मैं तीन बार इस्तेमाल करिये।

खाने में चावल के प्रयोग को बिल्कुल ही कम कर दीजिए।

यदि चावल खाने का बहुत मन करे तो भुजिया चावल का उपयोग मात्रा थोडा सा करें।


सुबह चिरायता के पानी का उपयोग करें।


इसके अलावा होम्योपैथी में सफ़लेंद्रा इंडिका क्यू, सिज़िज़ियम ज़म्बोलिनम क्यू का प्रयोग मधुमेह में बहुत ही लाभदायक होता है।


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